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वे सभी लोग, जो इन्वेस्टमेंट करते है उनका एक मेइन मकसद होता है की, "कम से कम टाइम मे पैसे डबल हो ". वो भी सिक्योर और ट्रांसपेरेन्ट तरीके से।
सभी के पास ज्यादातर चार तरह की एसेट में इन्वेस्टमेंट करने का मोका होता है,
1. फिक्स डिपोजिट 2. इक्विटी यानि शेर मार्किट 3. गोल्ड 4. रियल एस्टेट
1. सिक्योर कितना है (Security), 2. रिटर्न क्या मिलेगा (Return), 3. सेल करना आसान है या नहीं (Liquidity)
जैसे कि आप जानते है फिक्स डिपॉजिट में इन्वेस्टमेंट सिक्योर है, सेल करना आसान है पर रिटर्न बहुत कम है। महंगाई को भी ओवरटेक नही कर पाता है।
इक्विटी यानि शेर मार्केट में रिटर्न मीडियम है, सेल करना आशान है पर रिस्क हाई है और रिटर्न माइनस में भी जा सकता है।
गोल्ड में इन्वेस्टमेंट सिक्योर है, और सेल करना आसान है पर रिटर्न low है । और पर्चेज़ करने के बाद हर बार पहनने पर गहनो का मूल्य कम होता रहेता है।
रियल एस्टेट में रिटर्न मीडियम से हाई है, इन्वेस्टमेंट सिक्योर है, सेल करना थोडा आशान है। इन चारों तरीको का आप कम्पेरिज़न करें तो पता चलेगा की सबमे "रियल एस्टेट" इन्वेस्टमेंट बेस्ट है।
1. एग्रीकल्चर लेंड 2. एन. ए. प्लोट 3. कंस्ट्रक्टेड प्रोपर्टी
1. सिक्योर कितना है 2. रिटर्न क्या मिलेगा 3. सेल करना आसान है या नहीं
इसका सबसे बड़ा रीज़न ये भी है की, किसी भी एसेट का वेल्यू दो तरीके से बढ़ता है. या तो उसकी डिमांड ज्यादा हो; या तो उसका स्टोक लिमिटेड हो। इन दोनों पयमाने पर लेंड में किया हुआ इन्वेस्टमेंट खरा उतरता है, क्यूँकी दुनियाभर में ग्रोथ की रफ़्तार तो बढ़नेवाली ही है तो लेंड की डिमांड भी बढती ही रहेगी। किन्तु लेंड का स्टोक लिमिटेड है, वो नइ पैदा नहीं कि जा सकती. ऊपर से जो है वो भी डूबती चली जा रही है, मतलब की कम हो रही है।
इन तीनों पेरामीटर से हम अभी मूल्यांकन करते है। कंस्ट्रक्टेड प्रोपर्टी में लेंड की वेल्यू बढती जाती है पर जो कंस्ट्रक्शन किया है उसकी वेल्यू कम होती जाती है। तो जितनी लेंड की वेल्यू बढ़ी है उसमे से जीतनी कंस्ट्रक्शन की वेल्यू कम हुई है वो माइनस करने के बाद प्रॉफिट होता है। और एग्रीकल्चर लेंड में इन्वेस्टमेंट सिक्योर है पर रिटर्न ज्यादा नहीं मिलता है। ये दोनों इश्यू एन. ए. प्लोट में सोल्व हो जाते है। जैसे की एन. ए. प्लोट में लेंड की वेल्यू बढती है उसका पूरा फायदा मिलता है। क्यूकि कंस्ट्रक्शन कोई वेल्यू कम नहीं होती है।
और एन. ए. प्लोट में आसपास के डेवलपमेंट की वजह से एग्रीकल्चर लेंड से ज्यादा रिटर्न तो मिलता ही है पर साथ ही एन. ए. प्लोट सेल करना एग्रीकल्चर लेंड के मुकाबले आसान है।
इसका एक सिंपल रुल है. जहाँ पर जयादा डेवलपमेंट हो रहा है और इन्वेस्टमेंट आ रहा है वेसी जगह पे इन्वेस्टमेंट करने से पेसे जल्दी ग्रो करते है।
पूरे इण्डिया में जहा 92000 हेक्टर का, मतलब सिंगापुर से चार गुना बड़ा, और इन्डिया का पहला "ग्रीन फिल्ड स्मार्ट सिटी" बन रहा हो,
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Let us check this Factor at Dholera SIR
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हमें तो आज की डेट में पूरे इन्डिया में कहाँ पर भी एसी जगह नहीं दिखती जहाँ इतनी सारी परियोजनाए एक साथ आकार ले रही हो ! तो जाहिर है दूसरी जगह के कम्पेरिज़न में डेवलपमेंट और इन्वेस्टमेंट बहुत ही ज्यादा आने से आपका इन्वेस्टमेंट भी ज्यादा तेजी से ग्रो होगा।
अभी हमने पार्ट 1 और पार्ट 2 मे जाना कि, कौन सी एसेट में और कहाँ इन्वेस्टमेंट करना चाहिए।
आपको हर किसी के साथ इन्वेस्टमेंट नहीं करना चाहिए।
किन्तु जो भी डेवलपर 1. सिक्योर्ड 2. लीगल और 3. ट्रान्सपरन्ट तरीके से इन्वेस्टमेंट करवाते है उनके साथ ही इन्वेस्टमेंट करना चाहिए।कभी कभी थोड़े ज्यादा बेनिफिट की लालच में लोग पैसो की सिक्योरिटी को नजर अंदाज करते है। उसकी वजह से पैसे बढ़ने की बात तो साईंड में रह जाती है पर जो इन्वेस्टमेंट किया है वो पैसा भी डूब जाता है।
आप ऐसे ही डेवलपर के साथ इन्वेस्टमेंट करे जिनका कम से कम 10 साल का प्रोजेक्ट एक्सपीरियंस हो और दूसरा ज्यादा से ज्यादा प्रोजेक्ट सेल किये हो।
इससे ये पता चलता है कि हर तरह के सारे इन्वेस्टरने बड़े लम्बे समय से अच्छे प्रोजेक्ट में इन्वेस्टमेंट किया है तो सबने सब तरह की लीगल स्क्रूटिनी करके ही लिया होगा तभी तो बहोत ज्यादा प्रोजेक्ट सेल किये होंगे और तभी दश सालो से ग्रोथ कर रहे होंगे। और दूसरा, डेवलपर आपको एन.ए., एन.ओ.सी., प्लान पास ये सारे डोक्युमेंट ओनलाइन प्रोवाइड करते है की नहीं वो भी देखे। जो भी डेवलपर आपको ये प्रोवाइड नहीं करते वो हो सकता है आपसे कुछ छीपा रहे हो । जैसे की प्लान पास के डोक्युमेंट सबसे पहले चेक करने चाहिए ताकि आपको पता लगे की पूरे 3 या 4 BHK का प्लान पास करके दे रहे है या फिर सिर्फ डमी यूनिट प्लान पास करके दे रहे है ! डमी यूनिट वाले किस्से में अभी सायद आपको कुछ सस्ता मिल भी जाये पर बाद में आप खुद 3 या 4 BHK का प्लान पास करवाने जायेंगे तो हो सकता है और भी ज्यादा महँगा पड़े !
ये जानने के लिए आप उनसे पान कार्ड और जी.एस.टी. रजिस्टेशन नंबर जरुर मांगे। जी.एस.टी. कितना % पे ले रहे है वो भी जाने। जी.एस.टी. के नए नियमो के अनुसार, जी.एस.टी. पुरे सेल डीड की वेल्यु का 5% होता है। और उसमे भी डेवलपर खुद का जी.एस.टी. क्लेम भी नहीं कर शकते है।
1. तो आप जी.एस.टी. 5% से कम या ज्यादा दे रहे है तो कुछ ना कुछ गलत हो सकता है ! 2. जी.एस.टी. हमेशा सेल डीड की पूरी एमाउंट पर ही लगता है। सेल डीड की पूरी एमाउंट के कुछ भाग पर लग रहा है तो भी गलत हो सकता है। 3. सेल डीड की पूरी एमाउंट में जी.एस.टी. आ जाता है तो भी गलत हो शकता है। तो जी.एस.टी. 5% से कुछ भी कम या ज्यादा है और सेल डीड की पूरी एमाउंट पे जी.एस.टी. नहीं लग रहा है तो अपने सी.ऐ. से सलाह जरूर ले।
प्राइज के अलावा बाकि कोई भी फेक्टर काम में नहीं आयेगा। अभी हम जानते है की प्राइज़ में ट्रान्सपरन्सी कैसे देखे !
इसका सबसे आसान तरीका है आप देखे की, डेवलपर ने आजतक जितने भी प्रोजेक्ट किये है और जो प्रोजेक्ट्स चालू है उसमें कितना सेल किया है और प्राइज़ क्या चल रही है; यह दोनों उनकी वेबसाइट पर ओनलाईन डिस्प्ले किया है या नहीं । क्यूकि ज्यादातर इन्वेस्टर को यही प्राइस फेक्टर सबसे ज्यादा महंगा पड सकता है। सारे प्रोजेक्ट में कितना सेल हुआ है वो लाइव वेबसाइट पर न रखने का कारण ये भी हो सकता है की अच्छे लोकेसन के प्लोट बाद में ज्यादा प्राइज मे सेल करने हो वो दिखाए ही नहीं । अभी प्राइज़ क्या चल रही है वो वेबसाइट पर ओनलाईन न रखने का कारन ये भी हो सकता है कि सबको अलग अलग प्राइज़ में बेचे और आप कम्पेरिज़न भी न कर पाए की आपका प्राइज़ बाकि सबके मुकाबले सही है या नहीं । तो पहेले तो आपको पता कर लेना चाहिए की, आजतक के सारे प्रोजेक्टस की प्राइज़ और प्लॉट बुकिग स्टेटस ओनलाईन है या नहीं ? इससे आप अपना बहुत सारा पैसा खरीदते समय ही बचा लोगे जो आगे जाके ग्रोथ का सबसे बड़ा कारण बनेगा । और ट्रान्सपरन्सी के लिए आपको ये भी देखना चाहिए की, प्रोपर्टी की प्राइज़ के अलावा और जो भी एडिशनल कोस्ट लगनेवाली है वो भी सारी पहले से ही वेबसाइट पर लाइव रखी है या नहीं । कभी कभी डेवलपमेंट कोस्ट के नाम पे बड़ी बड़ी एमेनिटी का नया नया नाम देके आप से ऐसे पैसे ले लिए जाते है जिसका आप अगले पांच या दश सालो तक यूज़ नहीं करनेवाले है।
तो ट्रान्सपरन्सी के लिए तीन फेक्टर्स देखिये; 1. उनके आज तक के सारे प्रोजेक्ट के प्लॉट्स का लाइव बुकिंग स्टेटस 2. प्राइज और 3. एडिशनल कोस्ट लाइव रखा है या नहीं ।आप ये फर्क भी जाने की आपका purpose लेंड में इन्वेस्टमेन्ट का ही हो ! अभी वहां पर रहेने का न हो ! इसलिए प्लोट इन्वेस्टमेंट में बड़ी बड़ी एमेनीटी के नाम पर आप ज्यादा इन्वेस्टमेंट न करे। सिर्फ बेसिक एमेनीटी में ही इन्वेस्ट करे । बाकी पैसा अपने पास बचाये । वैसे भी अभी से बनी हुई एमेनीटी 5 साल के बाद फिरसे बनानी पड़ेगी। तो ज्यादा इन्वेस्टमेंट एमेनीटी के नाम पर अभी से क्यों करना ? जो पैसे लेंड में लगे है वो बढ़ते है, ओर जो पैसे एमिनिटी में लगे है वो कम होते है । इसलिए स्मार्ट डिसीज़न ले। सिर्फ बेसिक एमेनीटी में ही इन्वेस्टमेंट करे, बाकी पैसा बचाये।
बस इस तरीके से आप सबसे ज्यादा रिटर्न देनेवाली ऐसेट में, सबसे ज्यादा रिटर्न देनेवाले लोकेसन पर, सबसे ज्यादा प्रोजेक्ट कम्प्लीट करनेवाले और प्लॉट्स बुकिंग स्टेटस, प्राइज और एडिशनल कोस्ट लाइव रखनेवाले डेवलपर के साथ इन्वेस्टमेंट करने के लिए जुडीऐ; ताकि यह फेक्टर ध्यान में रखकर किया हुआ आपका इन्वेस्टमेंट बाकी लोग जो इस फेक्टर को ध्यान में रखे बिना इन्वेस्टमेंट करते है उनके मुकाबले कम समय में डबल हो जाये।
अगर स्मार्ट डिसीज़न लेके बाकी इन्वेस्टर से ज्यादा ग्रोथ करना चाहते है, और ये सारे फेक्टर के बारे में पता लगाना चाहते है तो, आज ही हमारी वेबसाइट की विज़िट कीजिये।
India’s largest independent producer of renewable energy, Gurugram-based ReNew Power has finalised the location in Gujarat for its maiden solar cell and module manufacturing unit, reports Economic Times.The unit will come up in Gujarat’s Dholera with an initial investment of Rs 1,200 crore. The total investment in the unit will eventually rise. Read More...

Modi’s dream projects, is close to completion, chief minister Vijay Rupani claimed in the assembly on Wednesday. In a written response to a question by Dhandhuka MLA Rajesh Gohil, who sought to know the status of the Dholera SIR project, the CM said, “The total planned work in Dholera SIR Read More...

The Airports Authority of India (AAI) on Thursday issued tenders for the construction of the first phase of an international airport at Dholera in Gujarat, entailing an investment of Rs 987 crore, according to an official statement. Read More...

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